हरियाना का एक हिस्सा है मेवात। मेवात वही इलाका है जहाँ वोट बैंक के चक्कर एक नकली यादव सलीम खान बन जाता है। ऐसा सुना है की उसको मिनी पाकिस्तान भी बोलते हैं। क्यूँ बोलते हैं उसके बारे मे ज्यादा जनकारी यहाँ दे नहीं सकता। अपने एक मित्र को उस area मे नौकरी मिली है। मास्टरी की। मास्टर जी एक दिन बैठे थे तो किस्सा सुनाया वहा के स्कूल का। बताए हैं कोई भी बच्चा स्कूल आता ही नहीं है। कारण पूछते हैं तो बताया जाता है की मस्जिद मे गए थे। अगर स्कूल का समय आगे पिछे किया जाता है तो मस्जिद का समय भी आगे पिछे कर दिया जाता है ताकी कोई बच्चा स्कूल ना जा पाये। बच्चे पढने लिखने मे इतने जाहिल हैं की मास्टर लोग black board पर answer लिख दें तो बच्चे उसको copy तक नहीं कर सकते हैं। अभी जो exams हुए उसमे एक question के जवाब मे एक बच्चे ने लिखा मास्टर तेरी @#*! ... लेकिन मास्टर को सख्त हिदायत है की खबरदार अगर किसी बच्चे को फेल किया तो। वो बच्चे साल दर साल आगे की कक्षाओं मे बढते जा रहे हैं जिनको लिखना और पढना तो दुर समझना तक नहीं आता। मुस्लिम पर्सनाल लॉ की बैठक चल रही है कही जयपुर मे। बोलते हैं की बोर्ड ने बोला है की ये सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के विरुध काम कर रही है। मुस्लमान अपने आप को असुरक्षित महसुस कर रहा है। किसी सिरफिरे का नारा "एक हाथ मे कुरान, एक हाथ मे computer" बरबस ही याद आ गया। ए ईमान वाले भाइयों स्कूल मत जाओ। कोई जरूई नहीं। आप बस safe feel करो। बाकी सब तो खैर देखा ही जाएगा। आमीन ....
पहले जब जिंदगी में थोड़ी फुर्सत होती थी तब कभी कभार किसी मुद्दे पर अपने विचार डायरी में लिखता था. फिर फेसबुक आया और हम फेसबुक को एक रफ़ नोट बुक की तरह यूज़ करने लगे. अपना लिखा हुआ सुरक्षित रखने के लिए अब फेसबुक के साथ साथ यहाँ अपने ब्लॉग पेज पर भी लिख लेते हैं. इसका एक फायदा ये भी है की समय के साथ आपके लिखने में क्या सुधार हो रहा है वो आप बड़ी आसानी से समझ सकते हैं. इच्छा ये है की किसी दिन ज्यादा से ज्यादा बड़ा लिखने लायक सिख सकूँ और फिर गर्व से सबको दिखा सकूँ.
Wednesday, 25 March 2015
हिन्दू धर्म मे जात पात का उत्पात
बाकी धर्मों का तो खैर हमे खास ज्ञान नही। किन्तु हिन्दू धर्म मे जात पात का इतना उत्पात है की अब धर्म के बजाय जात से ज्यादा पहचान होने लगी है। किसी ने कहा था की हिन्दू धर्म दरअसल एक किराना स्टोर है। जहाँ सब कुछ मिलता है। जैसे हल्दी, धनिया, नमक इत्यादि। पर अगर आप किराना स्टोर पर जाकर दुकानदार से कहेंगे की 2 किलो किराना दे दे तो दुकानदार तुरंत ही आपको पागल घोषित कर देगा। कितनी अजीब बात है नाम किराना स्टोर पर किराना ही नही मिलता!! किराना को छोड़ कर बाकी सब कुछ मिलता है। ठीक वैसे ही हिन्दू हो गया है। हिन्दू को छोड़ कर सब कुछ मिलता है। इसलिये कुछ लोग यहाँ जम के शॉपिंग करते हैं। जैसे केजरीवाल जी ने कभी नही कहा मै हिन्दू हूँ पर ये बताना नही भूले की मै बनिया हूँ। मुलायम लालू जैसे नेता किराना स्टोर से यादव नाम का समान ज्यादा लेते हैं। मायावती जी भी जाती हैं किराना स्टोर। वो हरिजन पर ज्यादा हक जताती हैं। UPA और NDA भी गये थे किराना स्टोर से जाट को लेने पर अभी सुना है सुप्रीम कोर्ट ने देने से मना कर दिया है। अब अगले चुनावी सीज़न मे फिर से जायेंगे। ए भाई हमको जाट देना जरा।
गुरु जी और बिच्छू का डॅंक
RSS के दूसरे सरसंघचालक श्री माधव सदाशिवराव गोवलकर को सभी संघी गुरु जी के नाम से जानते हैं। बात तब की है जब गुरु जी बनारस हिन्दू University मे पढ़ा करते थे। एक दिन गुरु जी अपना एक पाँव बाल्टी मे रख कर पुस्तक पढ़ने मे वयस्त थे। उनके किसी मित्र ने पूछा की ऐसे क्यूं बैठे हो? गुरु जी ने बताया की "पाँव मे बिच्छू ने डॅंक मारा है। इसलिये Potassium Per-magnet के solution मे पाँव रख कर बैठा हूँ। इस से बिच्छू का विष धीरे धीरे अपने आप निकल जायेगा।" मित्र को बड़ा आश्चर्य लगा। असहनीय दर्द के बारे मे पूछने पर बोले की "भाई बिच्छू ने पाँव मे डॅंक मारा है, मस्तिषक मे नही। तो भला पुस्तक पढ़ने मे कैसी दिक्कत।" अपने प्रधान सेवक मे जो ये डॅंक वाला दर्द सह कर भी मस्तिषक को काबू मे रखने की गज़ब की क्षमता है ये जरूर संघ से ही आई है। डॅंक कितने भी लगते रहें लेकिन मज़ाल कोई बंदे का ध्यान असली मुद्दे से हटा दे। अश्वमेध यग चालू आहे।
Monday, 9 March 2015
J&K - “मियाँ की जूती मियाँ के सर”
किस्सा तब का है जब पंडित मदन मोहन मालवीय बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी बनाने के लिए लोगों से चंदा मांग रहे थे | शिक्षा का प्रसार भारत में उस समय काफ़ी कम हो गया था | उच्च शिक्षा के लिए तो जागरूकता भी नहीं थी और संसाधन तो भारत में थे ही नहीं | अंग्रेजों की गुलामी के ऐसे माहौल में शहर शहर गाँव गाँव घूम कर पंडित जी लोगों को जगाने लगे |
जैसा की जाहिर है उनके इस भागीरथी प्रयास का मज़ाक उड़ाने वालों की भी कोई कमी नहीं थी | ऐसे ही एक बार जब वो हैदराबाद पहुंचे तो निजाम साहब के पास भी इस कार्य में मदद मांगने चले गए | निज़ाम साहब जरा सनकी थे, किसी बात पर उन्हें पंडित जी पसंद नहीं थे | उन्होंने टरकाने के इरादे से पुछा की कितना चंदा आप मुझसे उम्मीद करते हैं ? पंडित जी ने संकोच वश कह दिया जो भी आप दे दें इस सत्कार्य के लिए वही बहुत है | पंडित जी ने सोचा होगा निज़ाम साहब अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से देंगे | निज़ाम साहब ने अपने जूते पंडित जी को थमा दिए | कुटिल मुस्कान के साथ कहा, इस काम के लिए ये रहा मेरा चंदा, स्वीकार करें ! पंडित जी ने जूते समेटे और बाहर आ गए, अपने साथियों को उन्होंने कहा कल चार मीनार पर इनकी नीलामी होगी और जो धन आएगा उसे हम इस्तेमाल करेंगे | उनके साथ के लोग फ़ौरन हैदराबाद के सारे बड़े घरानों में दौड़ गए और सबको ख़बर किया की निजाम साहब ने अपने जूतों की नीलामी से आने वाला पैसा यूनिवर्सिटी बनाने के लिए देंगे |
जंगल की आग की तरह खबर सारे शहर में फ़ैल गई | निज़ाम साहब की गरीबी की बातें होने लगी, शहर में चर्चा हुई की अगर निज़ाम साहब के पास धन कम है तो हमें ज्यादा से ज्यादा कीमत पर जूते ख़रीद कर अपने निज़ाम की इज्ज़त बचानी चाहिए | अब तो निज़ाम साहब का दांव उल्टा पड़ गया ! मरता क्या न करता ! आखिर अगले दिन निजाम साहब की माँ ने जुटे साढ़े चार लाख में ख़रीदे और वो धन यूनिवर्सिटी बनाने में गया | इस तरह कहावत शुरू हुई “मियाँ की जूती मियाँ के सर” !
अब पुराने ज़माने में तो शाहरुख़ को फिल्मों में कहना पड़ता था “My name is Khan and I am not a Terrorist.” और आज ये हाल है की किसी मुसलमान को बिना चार्ज शीट के जेल में रखने पर प्रधानमंत्री आक्रोशित हो रहे हैं ! सेक्युलर होने का ढोंग रचने वाली पार्टियों के पेट में उबाल आ गया है| पहले जब सोलह बार रिहा किया था तो नहीं याद आया था ? मियाँ की जूती मियाँ के सर पड़ गई तो दर्द हो रहा है ?
J&K - भाजपा को शहद की लालसा।
अगर आपके पास कोई भी protective equipment नहीं है तो शहद पाने के लिये आपको मधुमक्खी के छत्ते मे सीधा हाथ ही डालना पड़ेगा। हालांकि शहद पाने की लालसा मे हाथ का जख्मी होना भी स्वभाविक है। जख्मो के लिये remedy तैयार रखना आपका काम है। भाजपा ने सिर्फ और सिर्फ छत्ते मे हाथ डाला है। पर मुफ्ती को देख कर लगता है की इस केस मे मधुमक्खी भी confidence मे नहीं डर मे जी रही है। शहद लूट जाने के डर मे। मेरा मानना है की अलबत्ता तो आपको ऐसे उल्टे पंगे लेने ही नहीं चाहिये थे। पर अब जब छत्ते मे हाथ डाल ही दिया है तो डटे रहो। हाथ जख्मी करवाने के बाद भी बिना शहद लिये आने सिर्फ और सिर्फ मूर्खता ही कही जायेगी। अभी तो बस शुरुआत है डॅंक तो कई लगने बाकी हैं। हमे कोई जल्दी नहीं बस आते हुए जरा सा शहद लेते आना। डटे रहो।
communal त्यौहार - होली
हर दूसरे दिन एक communal त्यौहार। देखो भैया साम्प्रदायिक लोगों। कोई होलिका दहन नहीं करेगा। एक साथ पूरे देश भर मे इतनी बड़ी सँख्या मे होलिका दहन करने से उसमे से carbon-mono-oxide निकलेगी। यह गैस सौरमंडल मे जाकर ozone layer को टक्कर मार सकती है। जिस से सूर्य से निकलने वाली हानिकारक किरणे सीधे आपके नश्वर शरीर मे घुस जाएंगी और फिर जानलेवा कैंसर आपको तड़पा तड़पा कर मारेगा। और अगले दिन खबरदार जो किसी ने पानी की बर्बादी की तो। एक दिन मे आप सब लोग मिलकर इतना पानी बचा सकते हैं की उस से महाराष्ट्र के पूरे विदर्भ का सूखा झट से खत्म हो जाये। जो पानी आप बचाएंगे वो य्य्ये बड़ी बड़ी पाईप लाइनों से अगले ही दिन विदर्भ पहुंचा दिया जायेगा। और फिर आपको चारों और हरियाली और खुशहाली दिखाई देगी। इसलिये येन केन प्रकरेण देश मे रामराज्य स्थपित करने मे सहयोग करें। और हम इस बार आपको "होली के त्यौहार की ढेर सारी शुभकामनाएं" ऐसा बिल्कुल नहीं बोलेंगे। अब तो प्लीज़ दे दो secularism का एक certificate हमे भी। I am also a Secular ...... ह्हहूऊऊऊ।
Thursday, 26 February 2015
गंदी खिड़की और रेल बजट
एक शादीशुदा जोड़ा नये मकान मे रहने को आता है। पत्नी सुबह सो कर उठने के बाद जब बाहर का नज़ारा देखने को शीशे लगी खिड़की से पर्दा हटाती है तो क्या देखती है की सामने वाली पड़ोसन ने अपनी बालकॉनी मे कपड़े धो कर सुखाये हुए हैं। पत्नी अपने पति को बोलती है की जी देखो कितने गंदे कपड़े धोये हैं इसने। पति सुन कर मुस्कुराता है। फिर तो यह सिलसिला बन गया। पत्नी रोज़ सुबह उठ कर देखती तो पाति की गंदे तरीके से धोये हुए कपड़े आज भी उनके शीशे के सामने सुखाये हुए हैं। पत्नी रोज़ पति को औरत के बारे मे ताना मारती और पति रोज़ मुस्कुरा देता। एक दिन जब पत्नी फिर से पड़ोसन की हंसी उड़ाती है तो पति उठ कर कपड़े से खिड़की का शीशा साफ कर देता है। जब खिड़की अच्छी तरह से साफ हो जाती है तो पत्नी जी को बहोत ही साफ सुथरे और एकदम चमकदार कपड़े दिखाई देते हैं। वो समझ जाती है की कमी पड़ोसन के कपड़ों मे नहीं उनके शीशे मे थी। ये घिसी पीटी किन्तु काम की कहानी आज तब याद आई जब एक जोकर से दिखने वाले तथाकथित पत्रकार ने बोला की मोदी ने रेल का किराया इसलिये नहीं बढ़ने दिया क्यूंकि मोदी सरकार डर गयी है। महाशय हमे लगता है की आपको अपना शीशा साफ करने की जरूरत है। बजट पूर्ण रूप से साफ सुथरा एवं एकदम चमकदार है।
अनशनकारी बाबा और भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का लबादा
सुनो। जरा इधर फोकस करना। light, camera..... action। अनशनकारी बाबा आ रहे हैं फिर से। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का लबादा ओढ़े हुए। माहौल तैयार हो चुका है। इस बार दिल्ली मे सरकार भी इनकी। लोग भी इनके। मीडिया भी इनकी। इस बार नये इमानदार समाजसेवियों को ला रहे हैं। समाजसेवी from another NGOs। और सुनो। वो जो अपने नये नवेले नोबेल विजेता हैं ना। वो भी देर सवेर आते ही होंगे। सांप्रदायिकता का झुनझुना इस बार बजा नहीं सो अगली बार पूंजीपतियों की सरकार verses इमानदारी का नारा गूँजेगा। तैयार रहें मोहरा बनने के लिये।
Wednesday, 18 February 2015
छाज बोलै तो बोलै छलनी भी बोलै
पहले कहावत सुनिये। छाज बोलै तो बोलै छलनी भी बोलै जिसमे 70 छेद। अब चरितार्थ होते हुए देखिये। छाज बोला नीलामी करेंगे। छलनी बोली सरकारी खजाने मे जमा करो। जनता बोली 3 ट्रक भर के कोन ले गया था? रोलेक्स की घड़ियाँ अपने घर कोन ले गया था? छलनी चुप। छाज बोला 10 लाख का नहीं है। गिफ्ट मिला है। छलनी बोली गिफ्ट के बदले मे क्या काम करने का वादा किया? जनता बोली दुबई के चंदे के बदले क्या काम करने का वादा किया? छलनी चुप। अबकी बार छलनी पहले बोली। पूछा गिफ्ट किसने दिया? छाज बोला ये रहा मेरा गुजराती भग्त। इसने दिया। जनता बोली आधी रात का चंदा किसने दिया? छलनी चुप।
Happy MahaShiv Ratri.....'Spirituality' and 'Charity'
Seculars what about this...Tell me if I am wrong!!!!!
Today some people inspired by PK, OMG will advise not to waste milk in temples and give it to poor people.
This suggestion is good but some other points can also be discussed. Milk to Lord Shiv is 'Spirituality' and Milk to poor is 'Charity'. Both activities can not be compared and can not replace with each other. Also, Devotees are not responsible for shortage of Milk. Devotees are not responsible for poverty. Devotees already do more charity than others based on %age of income.
1. How about promoting less consumption of alcohol and doing charity with saved money.
2. How about sacrificing other forms of enjoyment and doing charity with saved money
3. How about promoting 'Earn in India - Spend in India'
4. How about taking steps to produce more milk.
5. How about do not slaughter animals which gives milk, that itself will generate lots of milk.
Abhishek milk going in drains is not a question on spiritual ritual it is rather bad management. The same milk can be used in many other forms including poos whose movies are trying to pinpoint spirituality. A big charity can be done in that way....Happy MahaShiv Ratri.....
Wednesday, 11 February 2015
नर्सरी मे IAS की तैयारी
अपने यहाँ दरअसल क्या होता है की बच्चे जब पढ़ते हैं तब उनको ये नहीं पता होता की बड़े होकर क्या करना है। जैसे की क्या पढ़ाई करनी है। कहाँ से करनी है। करियर कैसे बनाना है। वैगरह वैगरह। इस सब के बीच अगर आपको कोई ऐसा बच्चा मिल जाये जो नर्सरी मे ही बता दे की उसको बड़ा होकर IAS बनना है तो कैसा लगेगा? और वो बच्चा अगर नर्सरी मे ही आपको IAS की तैयारी करता भी दिख जाये तो यकीन मानिये आपके पास शब्द नहीं होंगे बोलने के लिये। चलिये आपको ऐसे ही एक नर्सरी के बच्चे से मिलवाते हैं जो IAS की तैयारी कर रहा है। कल आप लोगो ने एक फोटो बहोत देखी होगी TV, अखबारों मे। केजरीवाल जी अपनी धर्मपत्नी से चिपके हुए। ये ही वो तैयारी है जो 2019 मे काम आयेगी। 2019 मे भी मुद्दों का अभाव होने वाला है। तब ये फोटो फिर से फिजाओं मे तैरेगी। ये देखो कितनी इज्जत करता है अपनी औरत की। कैसे दुनिया के सामने उसको क्रेडिट देता है। और एक वो मोदी है जो ......... हाय हाय। मोदी हाय हाय। जशोदा बेन को न्याय दो हाय हाय।
Tuesday, 10 February 2015
दिल्ली की जनता तहेदिल से शुक्रिया
दिल्ली की जनता तहेदिल से आपका शुक्रिया। आपने एक ही झटके मे सरकार को बहोत कुछ सीखा दिया। आपने इस सरकार को निंरकुश होने से बचा लिया। आप लोगों ने एक को जीता दिया और दूसरे को जगा दिया। सिंघासन खाली करो की जनता आती है। दूसरी बात, आज पहली बार केजरीवाल को दिल से धन्यवाद बोलने का मन कर रहा है। हे केजरीवाल जी। बहोत बहोत धन्यवाद आपको। आपने भले ही नाटक किया हो पर जाने अनजाने मे एक अच्छी राजनीति की शरुआत की है। आपने नकारा बन चुके मोटी चमड़ी के नेताओं को बता दिया है की अब चुनाव जितने के लिये AC कमरो से बाहर निकलना पड़ता है। अब सिर्फ 20 दिन के चुनाव प्रचार या किसी स्टार को सामने कर देने से चुनाव नहीं जीता जायेगा। आपको घर घर जाकर अपने काम का हिसाब देना होगा। गलती हुई है तो माफी मांगनी होगी। एक बार फिर से आपका धन्यवाद। ये मेरा पहला और आखिरी धन्यवाद है आपको। चूंकि हम दिल्ली मे नहीं रहते इसलिये हमे कुछ फ्री नहीं चाहिये। तो अब आलोचना शुरू होगी।
Monday, 9 February 2015
युधों के तरीके और केजरीवाल
युधों के तरीके बदल गये हैं। पहले के जमाने मे राजाओं की सेनायें आमने सामने लडाईयां लड़ती थी। उसके काफी नुकसान थे। महीनो और कभी कभी वर्षों तक युध् चलता था और जान माल की हानि भी बहोत होती थी। फिर तीर - तलवारों की जगह बंदूक और तोप ने ले ली। इससे लड़ाई थोड़ी जल्दी खत्म तो हो जाती थी पर जान माल की हानि दोनो तरफ से ही काफी ज्यादा होती थी। बाद मे मिसाईल-रॉकेट आ गये। इसमे भी लड़ाई खत्म तो जल्दी होने लगी पर जान माल की दोनो तरफ से ही हानि अब भी उतनी हो होती थी। कोई रास्ता ना सूझ रहा था लड़ने का। फिर 2 चीज़ें introduce हुई। पहला cobart ऑपरेशन। इसमे अपने लोग चुपचाप शत्रु देश मे भेजे जाते हैं और बहोत ही secret तरीके से मुख्य दुश्मन को मरवा दिया जाता है। जैसे की लादेन के केस मे अमेरिका ने किया। किंतु इसमे भी कुछ दिक्कत है। मसलन अगर आपके एजेंट पकड़े गये तो? या विश्व समुदाय का दबाव। वैगरह वैगरह। तो बचा दूसरा तरीका। इसमे जिस देश के खिलाफ कार्यवाही करनी है, उसी देश के लोगों को साम दाम दंड भेद अपना कर अपने ही देश के खिलाफ भड़काओ। इसका फायदा ये है की दुश्मन भी मरता है और आपका दामन भी पाक साफ रहता है। ये है भी बहोत आसान तरीका। इसके लिये वहां के कुछ NGOs को भारी funding, कोई international level का award और कुछ थोड़ा बहोत लालच देकर उनसे अपने लिये काम करवाओ। ज्यादा से ज्यादा भोले भाले लोगों को जोड़कर उनको भड़काओ। आये दिन धरने प्रदर्शन करवाओ। तोड़ फोड़। सरकर विरोधी नारे। इस से क्या होगा? इस से उस देश की प्रगति रुक जाती है। सरकार काम धाम छोड़ कर अपनी सरकार बचाने मे लग जाती है। इसका एक सरल सा example देखिये। कोई दुकानदार प्रतिस्पर्धी दुकानदार का धंधा खराब करने के लिये नगर निगम के पाइप लाइन वालों को पैसे खिलाता है कि प्रतिस्पर्धी की दूकान के सामने फूटपाथ खोद रखो ताकि ......समझे? इसके मोहरे देखिये........नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़ी मेधा पाटकर। तिस्ता सीतलवाड। और ...... नहीं नहीं केजरीवाल तो आम आदमी है। कृपया अन्यथा ना लें।
हाँ एक बात और ........ अगले election मे हाल ही के आपके दुलारे नोबेल पुरुस्कार विजेता भी कूदेंगे मैदान मे। इमानदारी और भ्रस्टाचार और सांप्रदायिकता के नाम पर। तैयार रहे मोहरा बनने के लिये।
Sunday, 8 February 2015
The Bomb has exploded
कल एक किताब का कोई अंश पढ़ने को मिला। सुनिये कुछ यूं था - एक बार एक विमान के अन्दर एक टेररिस्ट होता है। इसे सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य की ये बात सिर्फ विमान स्टाफ को पता चली, अन्य यात्रियों को नहीं। किसी तरह की परेशानी ना हो इसलिये विमान का स्टाफ उस टेररिस्ट को घेर लेता है। और एयर होस्टेस टेररिस्ट के हाथ से बम वाला पार्सल छीन लेती है। पर तभी विमान मे बैठा एक आम आदमी जिस से दूसरे बेचारे आम आदमी का दुख सहन नहीं हुआ, तुरंत हरकत मे आता है और फुर्ती से ऐअर होस्टेस के हाथ से वो पार्सल छीनकर उस टेररिस्ट को दे देता है। वो सोचता है कि उसने एक विमान स्टाफ के अत्याचारों के खिलाफ एक आम आदमी की मदद की। जब तक extra समझदार आम आदमी को super extra आम आदमी की हकीकत समझ आती है तब तक बम फट चुका होता है। दिल्ली वालों आपको आपका नया मुख्यमंत्री मुबारक हो। The Bomb has exploded .... All The Best ....
Tuesday, 3 February 2015
Women Empowerment
एक बार एक नेक दिल बॉस ने समझाया था..... If you want to kill an idea, take it to a meeting ..... इसलिये चुपचाप पहले उ को निपटाय दो फिर बखान करना। ई women empowerment क्या है भाई? कृप्या कर के कोई इसको explain कर सकता है क्या? नहीं मेरा सवाल ये है की ऐसा क्या होना चाहिये जिसके बाद लगे की हाँ अब महिलाएं सशक्त हो गयी हैं। क्या नौकरी कर लेने से सशक्तिकरण होगा, या परिधान की बाधाएं आड़े आ रही हैं? जैसे की चलो मान लिया की आप जो मन मे आये वही पहन कर घूमो फिरो आज़ादी से तो फिर सशक्तिकरण हो जायेगा? या चुनाव लड़ने से? तो मतलब BJP ने बेदी को लाकर कर दिया महिला सशक्तिकरण? या reservation से? नहीं समझ आया ना? खुद महिलाओं को ही समझ नहीं आया है अभी तक। ठीक उसी तरह महिला सुरक्षा की बात बड़ी हवा हवाई हो रही है आजकल। अब इसपे भी वही सवाल है। महिला सुरक्षा के क्या मानदंड होने चाहिये? ये आंकड़ा कैसे मापा जायेगा की अब महिलाएं सुरक्षित हो गयी हैं? क्या ऐसे की रेप हुआ तो असुरक्षित और नहीं हुआ तो सुरक्षित? अब 24 घंटे बिजली पानी देंगे और आपके गांव मे पक्की सड़क बनायेंगे टाइप के मुद्दे खतम मान लिये गये हैं। इसलिये ये महिला सुरक्षा उसका ही नया अवतार है। करना किसी को कुछ नहीं है। महिला सुरक्षा करेंगी खुद महिलाएं ना की कोई 2 कौडी का नेता। सीधी सी बात है। जब कोई काम जो करना नहीं हो तो उसको चुनाव मे मुद्दा बना दो। काम कभी होगा ही नहीं। women empowerment कभी नहीं आ सकता। women empowerment is not measurable।
Monday, 2 February 2015
ह्म्म्म।
सुनो। ह्म्म्म। मै आपसे बहोत प्यार करती हूँ। हप पागल। कितनी बार बोलोगी। एक ही दिन मे 50 से ज्यादा बार बोलती हो। हाँ तो इस प्यार को आपके लिये जितना बयान करूं उतना ही कम है। ह्म्म्म। ठीक है, बोलती रहा करो। अच्छा लगता है मुझे भी। वो तो मै बस ऐसे ही थोड़ा भाव खा रहा था। अच्छा एक बात तो बताओ। हाँ पूछो। आप मुझे प्यार करते हो? ये भी कोई पूछने वाली बात है पागल। नही बताओ ना। देखो मुझे बस इतना पता है की मै तुम्हारे बिना रहना नहीं चाहता। तुम्हारे बिना कुछ करना, घूमना फिरना, खाना पीना, खेलना, हंसना, रोना, सोना कुछ भी नहीं करना चाहता। इसको तुम प्यार कहती हो तो हाँ मै तुम्हे प्यार करता हूँ। अच्छा !!? ह्म्म्म। ए जी। सुनो ना। ह्म्म्म। आप मेरी जिंदगी मे नहीं होते तो क्या होता। कुछ नहीं होता पगली। मै नहीं होता तो कोई और होता। जी नहीं। कोई नहीं होता। और होता तो भी पता नहीं इस समय मेरा क्या हो रहा होता। मै भी कितनी लकी हूँ जी। जो इतना अच्छा पति मिला है। ह्म्म्म। अच्छा बस करो अब। इतना ज्यादा इमोशनल होने की जरूरत नहीं है। ये बताओ तबियत कैसी रहती है तुम्हारी? अभी पेट दर्द मे कुछ आराम हुआ? हाँ जी। अभी कल से थोड़ा आराम है। अब आपसे बात कर ली ना तो बिल्कुल ठीक हो जायेगा। काश अभी आप यहाँ मेरे पास ही होते। फिर तो मुझे किसी दवाई की जरूरत ही नहीं पड़ती। ह्म्म्म। कोई ना मै आता हूँ ना। जल्दी ही। बस कुछ दिन और अपना ध्यान रख लो। फिर मै सब संभाल लूंगा। कोई काम नहीं करने दूंगा तुम्हे। और हाँ आते ही तुम्हारे लिये एक running मशीन भी ला कर देनी है। सारे दिन घर मे बैठी बैठी मोटी हो गयी हो। और फिर तुम्हे कहीं घुमाने भी तो ले जाना है। कहाँ चलोगी इस बार? जी पहाड़ों मे। जहाँ खूब सारी हरियाली हो। जैसे की जी दार्जलिंग। वैसे तो आपके साथ कहीं भी जाउ सब जगह अच्छी लगती है। ह्म्म्म। चलो तुम कोई अच्छी सी जगह सोच कर प्लान बना लो फिर मै टिकेट बुक करवा देता हूँ। अभी रखूँ? जरूरी है क्या? ह्म्म्म। फिर कब करोगे? जल्दी ही। ठीक है जी। अपना ध्यान रखना। ठीक है पगली अभी तो तुम्हे अपना ध्यान रखने की जरूरत है। जल्दी से ठीक हो जाओ तभी तो घूमने जा पाओगी। है ना? हाँ जी। ध्यान रखना अपना। कोई दिक्कत हो तो मम्मी से बात करना। मै जल्दी ही फोन करूंगा। ठीक है जी मै इंतज़ार करूँगी। और सुनो। हा बाबा जल्दी बोलो। I Love You जी। ह्म्म्म। Byeee। ह्म्म्म।
.
क्रमश: .....
Thursday, 29 January 2015
Stockholm Syndrome
एक होता है Stockholm Syndrome। इसके बारे मे प्रचलित कहावत कुछ यूँ हैं एक बार किसी गैंग ने एक गांव के लोगो को बन्दी बना लिया। उन्हे बन्दी बना कर खूब जुल्म डहाये गए। लोग बन्दी थे सो कुछ कर भी नहीं सकते थे। बेचारे जुल्म सहते गए। खैर समय बीता और सरकार को पता लगा। अपने सिपाही भेजे गांव वालों को छुडाने के लिये। पर हुआ क्या। गांव वाले डाकुओं से लडने की बजाय सिपाहियों से ही लड बैठे। डाकुओं की रक्षा के लिये। इसको कहते हैं Stockholm Syndrome. मतलब Feelings of trust by a victim towards a captor.
पता नहीं क्यूं मुझे कुछ अपोलियों की हालत देख कर उनका Stockholm Syndrome से ग्रसित होने का भय सता रहा है। रब्बा खैर करे....
Tuesday, 27 January 2015
मनोवैज्ञानिक और अपना अपना नज़रिया
एक बार एक विश्व प्रसिध मनोवैज्ञानिक को शराबियों के एक ग्रूप को व्याखान देने के लिये बुलाया गया। उद्देश्य था शराबियों को शराब के नुकसान बताना। और उन्हे समाज सुधार की तरफ मोड़ना। मनोवैज्ञानिक ने एक काँच का गिलास लिया ओर उसमे दारू डाली। फिर उसमे एक कीड़ा डाला। थोड़ी देर बाद कीड़ा तड़प तड़प कर मर गया। ये दिखाते हुए मनोवैज्ञानिक ने शराबियों की तरफ देखते हुए पूछा बताओ इस से तुम लोगों ने क्या सीखा? थोड़ा सोचते हुए एक शराबी बोला की इस से हमने ये सीखा की दारू पीने से पेट मे कीड़े नहीं होते। बताते हैं की बेचारा मनोवैज्ञानिक बेहोश होते होते बचा। ये तो था कोई किस्सा। पर इसका एक पहलू ये भी है की हर आदमी का अपना अपना नज़रिया होता है चीज़ों को देखने समझने का। ये किस्सा कल उस समय तब याद आ गया जब श्रीमान राहुल गाँधी जी ने अपना नजरिया पेश किया और मीडिया के पूछने पर मोदी-ओबामा पर दिल्ली में बोला ''काम करने की बजाय निजी संबंध बनाए जा रहे हैं''. दिल्ली वालों ये जो अश्वमेध यग चल रहा है इसमे अपनी आहुति जरूर दाल देना। नौटन्की तो सारी जिंदगी चलती ही रहेगी। बाकी तो सब नजरिये का ही खेल है। हम तो खामख़्वाह मनोवैज्ञानिक बने घूम रहे हैं।
Friday, 23 January 2015
मीडिया की निष्पक्ष रिपोर्टिंग
एक मीडिया वाले भाई ने दूसरे मीडिया वाले भाई की पोल खोलने के लिये आज शाम को प्रेस कांफ्रेंस बुलाई है। घूम फिर कर बात वही बेचारे मफलर चच्चा और दिल्ली election पर ही आनी है। पिछले दिल्ली चुनाव से इस बार वाले दिल्ली चुनाव के बीच मे कितनी ही जगह चुनाव हो चुके हैं पर कहीं कोई हल्ला नही. पता नही क्यूं जहां पर ये बंदा involve होता है वही पर फसाद होना शुरू हो जाता है। क्या रणनीति बनाता है ये आखिर? इसकी सोच क्या है? क्या ये अपने आपको बेचारा साबित कर के सहानुभूति लेना चाहता है? यहाँ मुझे एक सवाल और है। जो पत्रकार लोग होते हैं उनकी भी तो वोट होती होगी ना? वो भी तो किसी ना किसी पार्टी को वोट तो देते ही होंगे। तो स्वभाविक है उनका भी कहीं तो झुकाव होगा ही। फिर ये कैसे हो सकता है की कोई पत्रकार या कोई चैनल निष्पक्ष रिपोर्टिंग करता है? तो भैया हम तो जे कह रहे हते की जिसको मोदी पसंद है वो मोदी सपोर्टेड चैनल देख लो। जिसको कज्जु पसंद है वो कज्जु को सपोर्ट करने वाले चैनल देख लो। नही तो चैनल देख कर वोट देना बंद करो। काहे इतना झगड़ते हो भाई। अपनी अकल लगाओ, दिखावे पर ना जाओ।
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