Friday, 24 April 2015

हंस-कौवे की प्रतियोगिता और केजरीवाल

हंसों का एक झुण्ड समुद्र तट के ऊपर से गुज़र रहा था, उसी जगह एक कौवा भी मौज मस्ती कर रहा था. उसने हंसों को उपेक्षा भरी नज़रों से देखा “तुम लोग कितनी अच्छी उड़ान भर लेते हो !” कौवा मज़ाक के लहजे में बोला, “तुम लोग और कर ही क्या सकते हो बस अपना पंख फड़फड़ा कर उड़ान भर सकते हो !!! क्या तुम मेरी तरह फूर्ती से उड़ सकते हो ??? मेरी तरह हवा में कलाबाजियां दिखा सकते हो ???…नहीं, तुम तो ठीक से जानते भी नहीं कि उड़ना किसे कहते हैं ! अगर तुम में से कोई भी मेरा मुकाबला कर सकता है तो सामने आये और मुझे हरा कर दिखाए .”
एक हंस ने कौवे की चुनौती स्वीकार कर ली. यह तय हुआ कि प्रतियोगिता दो चरणों में होगी, पहले चरण में कौवा अपने करतब दिखायेगा और हंस को भी वही करके दिखाना होगा और दूसरे चरण में कौवे को हंस के करतब दोहराने होंगे .
प्रतियोगिता शुरू हुई, पहले चरण की शुरुआत कौवे ने की और एक से बढ़कर एक कलाबजिया दिखाने लगा, वह कभी गोल-गोल चक्कर खाता तो कभी ज़मीन छूते हुए ऊपर उड़ जाता. वहीँ हंस उसके मुकाबले कुछ ख़ास नहीं कर पाया. कौवा अब और भी बढ़-चढ़ कर बोलने लगा ,” मैं तो पहले ही कह रहा था कि तुम लोगों को और कुछ भी नहीं आता …ही ही ही …”
फिर दूसरा चरण शुरू हुआ , हंस ने उड़ान भरी और समुद्र की तरफ उड़ने लगा. कौवा भी उसके पीछे हो लिया, "ये कौन सा कमाल दिखा रहे हो, भला सीधे -सीधे उड़ना भी कोई चुनौती है ??? सच में तुम मूर्ख हो !”, कौवा बोला . पर हंस ने कोई ज़वाब नही दिया और चुप-चाप उड़ता रहा, धीरे-धीरे वे ज़मीन से बहुत दूर होते गए और कौवे का बडबडाना भी कम होता गया, और कुछ देर में बिलकुल ही बंद हो गया. कौवा अब बुरी तरह थक चुका था, इतना कि अब उसके लिए खुद को हवा में रखना भी मुश्किल हो रहा था और वो बार -बार पानी के करीब पहुच जा रहा था. आखिर में कौवे को समझ आया की थोड़ी देर के लिए छोटी मोटी बन्दर टाइप उछल कूद मचाने से कहीं बेहतर है उड़ कर लम्बी दुरी तय करना.
उस कौवे को तो समझ आ गया. इस कौवे को कब समझ आएगा मालूम नहीं. सुना है आज फिर जंतर मंतर पर छोटी मोटी उछल कूद का कार्यक्रम रखा है. थोड़ी कलाबाजियां दिखाई जाएँगी. हंस को जम के कोसा जायेगा. 67 सीट आ गयीं. दूसरी बार मुखयमंत्री बन गया. जब वादों की बात आई तो बोलता है 40 % ही पूरा कर पाउँगा जी. इतना ड्रामा खुद की पार्टी में चल रहा है पर पता नहीं दूर तक उड़ना कब सीखेगा. इसको permanent जंतर मंतर पर ही शिफ्ट न कर दिया जाये?

मोदी की शतरंज की चाल और मसर्रत आलम

आज फिर मोदी-भाजपा की शान में. अच्छा ये बताइये, भाजपा पीडीपी सरकार से पहले कितने लोगों ने मसर्रत आलम का नाम सुना था. शायद ही किसी बुद्धिजीवी ने. जब वो बाहर निकला तो खूब हो हल्ला मचा. मिडिया वालों ने करण रुदाली कर कर के आमजन को बहरा बना दिया. हैरानी हुई ये सोच कर की कसाब तक को मासूम बच्चा बताने वाले लोग और मिडिया आखिर मसर्रत आलम की रिहाई पर चिंघाड़ कैसे मार रहे थे. आखिर एक झटके में इनका देश प्रेम जागा कैसे? दरअसल इन सबको उकसाया गया था. चिंघाड़ने के लिए. नहीं तो आपको क्या लगता है ये जो मसर्रत आज जेल में है अगर उसको उसी समय वापिस जेल में डाल दिया जाता तो अफजल गुरु की फांसी पर विधवा विलाप करने वाले इतनी आसानी से चुप बैठते? बकौल पटना वाले आनंद भाई, अपने मोहरे पिटवा कर बाज़ी जीतना इस बन्दे को बखूबी आता है. अटल बिहारी की तरह ये शख्स भी कभी तो फ्री होगा. तब जायेंगे इसके पास और बैठेंगे फुर्सत से शतरंज की बाज़ी सीखने के लिए.

चमड़े का जूता और राहुल गांधी

एक बार की बात है एक राजा था। उसका एक बड़ा-सा राज्य था। एक दिन उसे देश घूमने का विचार आया और उसने देश भ्रमण की योजना बनाई और घूमने निकल पड़ा। जब वह यात्रा से लौट कर अपने महल आया। उसने अपने मंत्रियों से पैरों में दर्द होने की शिकायत की। राजा का कहना था कि मार्ग में जो कंकड़ पत्थर थे वे मेरे पैरों में चुभ गए और इसके लिए कुछ इंतजाम करना चाहिए।
कुछ देर विचार करने के बाद उसने अपने सैनिकों व मंत्रियों को आदेश दिया कि देश की संपूर्ण सड़कें चमड़े से ढंक दी जाएं। राजा का ऐसा आदेश सुनकर सब सकते में आ गए। लेकिन किसी ने भी मना करने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह तो निश्चित ही था कि इस काम के लिए बहुत सारे रुपए की जरूरत थी। लेकिन फिर भी किसी ने कुछ नहीं कहा। कुछ देर बाद राजा के एक बुद्घिमान मंत्री ने एक युक्ति निकाली। उसने राजा के पास जाकर डरते हुए कहा कि मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूँ। अगर आप इतने रुपयों को अनावश्यक रूप से बर्बाद न करना चाहें तो एक अच्छी तरकीब मेरे पास है। जिससे आपका काम भी हो जाएगा और अनावश्यक रुपयों की बर्बादी भी बच जाएगी। राजा आश्चर्यचकित था क्योंकि पहली बार किसी ने उसकी आज्ञा न मानने की बात कही थी। उसने कहा बताओ क्या सुझाव है। मंत्री ने कहा कि पूरे देश की सड़कों को चमड़े से ढंकने के बजाय आप चमड़े के एक टुकड़े का उपयोग कर अपने पैरों को ही क्यों नहीं ढंक लेते। राजा ने अचरज की दृष्टि से मंत्री को देखा और उसके सुझाव को मानते हुए अपने लिए जूता बनवाने का आदेश दे दिया।लोक कथाओं के अनुसार ऐसे हुआ था जूते का आविष्कार.
राहुल जी अब चूँकि आप वापिस आ ही गए हो तो हमने सुना है आप देश भ्रमण की योजना बना रहे हैं. इतना तय है की आपके सैनिक व मंत्री भी आपसे कुछ कहने की हिम्मत नहीं दिखाएंगे. इसलिए आपसे निवेदन है की यदि आप वाकई कांग्रेस का भला करना चाहते हो तो देश की सड़कों को अपने कर्मो से ढकने की बजाय इस समय सिर्फ खुद को ही ढक लो. और बेचारी मरणास्सण कांग्रेस के ऊपर कुछ दया करो.

कसाई का छुरा और नेताओं की जबान

कसाई के पास छुरा है, नेताओं के पास जबान। अपने मतलब की बोटियां निकालने के लिये कसाई छुरा चलाता है, समाज को टुकडे टुकडे कर खास वोट बैंक को अलग निकालने के लिये प्रगतिशील नेता जुबान हिलाते हैं। सब नेताओं के अपने अपने लगे बंधे वोट बैंक हैं। एकता भाई-चारे के ढोल नगाडे बजाते हुए एक भाई को दूसरे भाई के विरुध चारे कि तरह इस्तेमाल करने की सोची समझी राजनीति ही दरसल सेक्युलर सियासत का सच है। वैसे तो तुष्टिकरण की राजनीति के लिये जनतंत्र मे कोई जगह नहीं होती लेकिन सेक्युलर ठप्पे के साथ नेत! मानो कुछ भी करने को अज़ाद होते हैं। यह ध्यान देने योग्य बात है की प्रगतिशील होने का ढोंग रचते हुए समाज को बांटने का षडयन्त्र इस सेक्युलर बिरादरी के ही खेमे मे रचा जाता है। विडम्बना है की समाज मे द्वेष बढाने के इस खेल मे जो जितना गिरेगा, उसका दर्जा खास वोट बैंक के नज़रों मे उतना ही उठेगा। कुछ प्रगतिशील नेताओं के दिये गये हाल के बयान: इंडियन मुजाहिद्दीन कोई आतंकवादी संगठन नहीं है - खुर्शीद। पदमभूषण नीच और चोर लोगों को मिलता है किसी गरीब को नहीं - शरद यादव। मालवीय और वाजपेयी को भारत रत्न इसलिये मिला क्यूंकि दोनो ब्राहमण थे, हरिजन होते तो नहीं मिलता - मायावती। अपने बाप की औलाद है तो हैदराबाद आकर दिखा - ओवैसी। कसाब एक मासूम लड़का था - अय्यर। 15 मिनट के लिये पुलिस को हटा दो - ओवैसी। मै बनिया हूँ - केजरीवाल। रामजादे या हरामजादे - प्राची। ताजमहल को सातों दिन सिर्फ नमाज़ के लिये खोलना चाहिये - आज़म खान। वोट बैंक, वोट बैंक सिर्फ वोट बैंक ...... अंतविहीन एवं दिशाहीन भारतीय राजनीति का सच।

Friday, 10 April 2015

यमन Operation

कई बार सोचा की मै कोई मोदी या भाजपा का एजेंट नहीं हूँ जो हर बार उनकी तारीफ मे ही लिखूं। लेकिन जिस तरह से मोदी जी के साथ साथ भाजपा के कुछ नेता भी अब काम करने लगे हैं, मुझे हर बार इनकी तारीफ करनी पड़ती है फेसबूक पर। सरकार ने जिस तरह से 3500 भारतीयों को यमन से निकाला है वो वाकई काबीले तारीफ है। जनरल VK Singh और सुषमा स्वराज ने जिस तरह से शांत और खबरों से दूर रह कर पर्दे के पीछे इस काम को अंजाम दिया है उसके लिये इनकी शान मे millions ton शाबाशी पेश की जाती है। नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गणपति राजू ने कहा है कि मैं जबसे नागरिक उड्डयन मंत्री बना हूं मेरी जांच नहीं होती है मेरे साथ सिगरेट की पैकेट और लाइटर भी रहता है, लेकिन कोई चेक नहीं करता। राजू ने कहा है कि वो चाहते हैं कि सुरक्षा ड्रील को और अर्थपूर्ण बनाया जाए। राजू ने बड़ी हिम्मत के साथ सुरक्षा जांच की खामियों को सामने ला कर रखा है। राजू, VK Singh और सुषमा स्वराज ने जिस तरह से काम किये हैं उसके लिये पहली बार मोदी जी के अतिरिक्त भाजपा के कुछ अन्य नेताओं और भारतीय जनता पार्टी के प्रति मन मे कुछ सम्मान पैदा हुआ है। बधाई हो सरकार।

लश्कर-ए ‪#‎मिडिया


आज सुबह की एक खबर - प्रधानमंत्री के कहने पर तम्बाकू उत्पादों पर चेतावनी वाला चित्र 80% तक बढाने पर सरकार विचार कर रही है। अब इस खबर पर लश्कर-ए ‪#‎मिडिया‬ का विषलेशन देखिये। ज्यों के त्यों शब्द - "सरकर ने लिया निर्णय। अब बिडी सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी का चित्र 80% तक होगा। आयें जाने इसका क्या असर होगा। एक अनुमान के मुताबिक ऐसा करने से बिडी पिने वालों की संख्या मे भारी कमी आ सकती है। बिडी मुख्यत तेलंगना मे बनायी जाती है। जहाँ 2 से 5 लाख परिवार बिडी बनाने के करोबार मे लगे हुए हैं। जिस से इनकी रोजी रोटी चलती है। अगर बिडी की माँग मे कमी आई तो इन 5 लाख परिवारों के भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। इन गरीबों के पास जीवन यापन का कोई साधन नहीं बचेगा। ये देखिये इनके छोटे छोटे बच्चे हैं। ये स्कूल नहीं जाते क्यूंकी स्कूल की फीस तो दुर इनको 2 समय की रोटी मिल जाये वही काफी है। पर अब लगता है सरकार ने इनके हिस्से की वो 2 वक्त की रोटी छीनने का भी फैसला कर लिया है। आखिर कोन सुनेगा इनकी फरियाद।" 
conclusion ...... अब जल्दी ही 5 लाख परिवार भूख से तडप तडप कर मर जायेंगे। त्राहिमाम त्राहिमाम। 
और आखिर मे एक सवाल - ये इतना बड़ा भय का माहौल कोन और क्यूँ बना रहा है? ये मिडिया की मानसिकता है या साजिश?

1 April - Happy Delhi Diwas

हमारे हरियाणा मे एक कहावत खूब कही जाती है। घणी सयानी दो बार पोवै अर फेर भी भूखी सोवै। इसके शुरू होने के पीछे की कहानी तो हमे नहीं पता पर सब लोग मतलब बखूबी समझते हैं। आज वो कोन है जो दो बार रोटी बनाने के बावजूद भूखा सो रहा है बताने की जरूरत नहीं। मैने पहले भी लिखा था The Bomb has exploded ..... दिल्ली वालों छोटे सर जी ने कल घोषणा की है की झुग्गियों की चारदीवारी करने का काम शुरू किया जायेगा। मतलब अब जहां एक झुगी बस्ती है वहां एक महीने बाद दो भी हो सकती हैं। कोई झुगी बस्ती तोड़ी नहीं जायेगी, बल्कि permanent की जायेगी। इसलिये जिसको जहाँ जगह दिखे जम जाओ भाइयों। कटवा लो अपने अपने नाम के प्लॉट दिल्ली मे। दूसरी बात - अभी अभी ज्ञान प्राप्त हुआ है की 2 साल बाद नगर निगम के चुनाव होने वाले हैं। इसलिये 2 साल तक ये कूडे वाला ड्रामा अब यूँही चलेगा। ताकि BJP पर इल्जाम लगा कर निगम के चुनाव भी जीते जा सकें।
क्या सोचा था.......सरदार खुश होगा........इनाम देगा.......? दिल्ली वालों कूडेयुक्त, बदबूदार सड़कें और झुगियों का शहर मुबारक हो। और हाँ Happy Delhi Diwas ....

Indian Education System और मेरे sub-ordinate के जवाब

मेरे सवाल और मेरे ही college से पढ़े हुए मेरे sub-ordinate के जवाब। मैने पूछा बता MP किसको बोलते हैं? बोला की MP वो होते हैं जो साले वोट सोट मांगने के लिये आते रहते हैं गांव मे। फिर मैने पूछा MP और MLA मे क्या फर्क है? बोला दोनो एक ही होते हैं। देश की राजधानी - गुड़गाँव। राष्ट्रपति - आडवाणी। प्रधानमंत्री - चौटाला। कितने राज्य हैं - लगभग 10 तो होंगे ही जब इतना बड़ा देश है तो। तेरा जिला कोन सा है - हरियाणा। वित मंत्री - पता नहीं ये शब्द पहली बार सुना है। इसके आगे सवाल पूछने की हिम्मत नहीं हुई। ये हाल उस लड़के का था जो graduate है 4 साल के professional experience के साथ। अब पहले comment मे जो लिंक है उस पर जाकर दी हुई विडिओ देखिये और जम के कोसिये सिस्टम को।
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