अभी कल परसों में एक एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस ने एक शातिर अपराधी को मार गिराया. मिडिया ने हाय तौबा मचा मचा कर दिल्ली पुलिस को दोषी ठहरा दिया है. जिस देश में पुलिस पर फैसला मिडिया और 2 कौड़ी के नेता करते हो वहां अपराध और अपराधी बंद नहीं हो सकते. घर वाले कह रहे हैं की मनोज तो कोई आतंकवादी नहीं था जी बस छोटा मोटा अपराधी था. जिस दिन घर वाले सीना ठोक के कहने लगेंगे के हमारा बेटा अपराधी है डालो साले को अंदर उस दिन आएंगे अच्छे दिन. मेरे एक परिचित दिल्ली पुलिस में ठीक ठाक रैंक पर हैं.उनके बॉस काफी ऊँची रैंक पर हैं. उन्होंने एक बार बताया था की भाई काम करने का मज़ा सिर्फ भाजपा के राज में ही है. कभी बेइज्जत नहीं होना पड़ता. काम करने की खुली छूट मिलती है. एक छोटा सा पुलिस वाला भी सीना ठोक के काम करता है. मेरे परिचित के बॉस के पास तत्कालीन गृहमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी जी का डायरेक्ट मोबाइल नंबर था. कितनी भी रात को कुछ भी दिक्कत होती डायरेक्ट आडवाणी को सूचित किया जाता. आदेश मिलता काम गलत नहीं होना चाहिए. खुल के काम करो. मैं तुम्हारे साथ हूँ. मेरे परिचित कहते हैं की अगर हमें ऐसे ही काम करने की छूट मिलती तो अपराध होना बंध हो जाएँ. पर नेता नहीं चाहते की ऐसा हो. अगर बिना जाँच हुए, मिडिया की बातों में आकर आप भी कल वाले एनकाउंटर में पुलिस पर सवाल उठा रहे हो तो You are what is wrong with our country.
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