उदाहरण 1:-
अपना एक मित्र पासपोर्ट बनवाने गया. लाओ जी जन्म प्रमाण पत्र दिखाओ..... नहीं है जी.... नहीं है तो यहाँ क्या करने आये हो? जाओ पंचायत, ब्लॉक, तहसील, जिला जहाँ से भी संभव हो अपना रिकॉर्ड निकलवाओ और जन्म प्रमाण पत्र ले कर आओ.....मित्र गली गली कूचे कूचे.....2 साल से अपने जूतों के साथ साथ नगर पालिका दफ्तर के फर्श को भी घीस घीस कर पतला कर दिया....पर जन्म पंजीकरण रिकॉर्ड नहीं मिल रहे हैं.....मिलती है तो बस तारीख पे तारीख....अगले सोमवार....15 दिन बाद....अप्रैल के पहले हफ्ते में......दे देंगे....तेरे माँ बाप क्या सो रहे थे उस समय......अभी मिला नहीं......अरे तू फिर आ गया दिमाग खाने......पहले क्यों नहीं लिया अब कहाँ से लेकर दें तुझे....ऐसे नहीं मिलता है बेटे समय लगता है....जब मिल जायेगा तो फ़ोन कर देंगे......
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उदाहरण 2:-
यहाँ पर एक सैन्य शासक की कहानी आपको रोचक लगेगी. अप्रैल 2005 में पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की भारत यात्रा से पूर्व ही भारत सरकार ने बेहतरीन मेहमाननवाजी के रूप में उन्हें एक ऐसा तोहफा देना ठीक समझा जो वह वाकई जिंदगी भर याद रखें - उनके जन्म का रिकॉर्ड..... बंटवारे से पूर्व भारत में एक साधारण परिवार में जन्मे मुशर्रफ कहीं के सितारे नहीं थे - पर फिर भी भारत सरकार को पूरी आशा थी उनके जन्म के सभी रिकॉर्ड्स मिल सकते हैं. तब प्रधानमंत्री कार्यालय के इशारे पर करीब 6 सरकारी नौकर नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल के जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र ऑफिस के 12 मोटे मोटे लेजरों को छांटने के काम पर लगा दिए गए. एक प्रवक्ता ने जल्दी ही मिडिया को सूचित किया कि NDMC के पास 1917 के बाद के सारे रिकॉर्ड सुरक्षित हैं. परिणाम स्वरूप जनरल मुशर्रफ को डाo मनमोहन सिंह ने उनके जन्म के पंजीकरण रिकॉर्ड भेंटस्वरूप दिए.... नेताजी रहस्य गाथा ....
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