Friday, 19 June 2015

भारतीय फ़ूड सेफ्टी मेकेनिज्म- भाग 2

एक लोकल कंपनी MNC को मिक्स मसाला supply करती थी. मतलब कई सारे मसालों को पीस कर मिक्स कर के blended spice भेजती थी. Example के तौर पर मटेरियल का नाम है मिक्स Veg सूप पाउडर........ MNC ने अपने standards दे दिए. साथ ही बता दिया की जी हमारा ये मसाला यहाँ से और वो वाला वहाँ से आना चाहिए. ठीक है जी हो जाएगा. पर होता क्या है. पढ़िए ...
सीन 1 - उदाहरण के तौर पर अगर आप गुंटूर की अच्छी क्वालिटी की साबुत हल्दी लेने जाएँगे तो आपको 70 से 80 रुपये प्रति kg मिलेगी. जबकि आपको बेकार क्वालिटी की हल्दी मध्य प्रदेश वैगरह से 40 से 50 रुपये प्रति किलो की दर से मिल जाएगी. लोकल कंपनी ने कुछ टन material अच्छे अच्छे vendors से मँगवाया. बिल्कुल A1 क्वालिटी का. Purchasing और बाकी सारी ज़रूरत के कागजात फाइल मे लगा दिए गये. जो material आया उसका बकयादा lot number generate किया गया. फिर MNC के क्वालिटी विभाग को सूचित किया गया. आ जाओ जी आपका मेटीरियल आ गया है. इस से पहले हम उसको process करें आकर raw material check कर लो..... MNC के क्वालिटी analysts आए..... sampling हुई..... material पास हो गया...... ऑर्डर मिला please proceed for further process. अब लोकल कंपनी ने कोल्ड स्टोर से सड़ा हुआ माल मँगवाया. उसको process करवा दिया. Bacterial load कम करने के लिए ETO प्रोसेस करवा दिया गया. और material dispatch. रिपोर्ट आई material is quality passed.
सीन 2 - जो A1 मेटीरियल स्टोर मे पड़ा था. उसके बैग चेंज किये गये. बैग के उपर नया लॉट नंबर लिखा गया. purchase के और बाकी ज़रूरत के फर्जी पेपर बनाए गये. जिस से मेटीरियल लेना था उसको कुछ गिफ्ट्स भिजवाए गये. बिल generate हुए. सारा काम सेट होने के बाद MNC को inform किया गया. आ जाओ आपका मेटीरियल आ गया है. MNC से क्वालिटी वाले आए. sampling हुई. Material passed. Proceed for further process. स्टोर से सड़ा हुआ माल आया....
सीन 3....सीन 4....सीन 5.....सिलसिला बदस्तूर जारी है....
आप बात करते हो क्वालिटी की ....... साहब यहाँ कमीशनखोरी के आगे जान की बाजी लगती है.

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