Saturday, 16 May 2015

हम भारत गणराज्य के मुफ्तखोर लोग .......भाग 1(मुआवज़ा And Reservation)

मुआवज़ा Issue is equivalent to reservation Issue. No one can oppose openly. खेती मे इस बार फिर नुकसान हुआ. बताते हैं जितना नुकसान इस बार हुआ उतना ही नुकसान लगभह हर तीसरे चौथे साल होता ही रहता है. कितनी बार तो मैने खुद देखा गेहूँ को खेत मे कुंभकर्णी नींद सोते हुए. ऐसी नींद की कटाई के समय गेहूँ उठाए ना उठे. पर मज़ाल जो कभी किसी सरकार ने सोई हुई फसलों की तरफ मुँह भी फेरा हो. लेकिन इस बार सरकार आई, बड़े बड़े सरकारी अमले गमले सब आए. और भैया य्य्य्य्ये बड़े बड़े आँसू टपकाते हुए हमेचैक थमा दिए. हमने बोला माई बाप ये क्या करते हो, हमे भीख नही चाहिए. तभी धीरे से कोई कान मे फुसफुसाया अरे बेवकूफ़ ये भीख नही मुआवज़ा है. ले ले. अच्छा!! पर आज तक कभी नही मिला. तब भी नही जब 100% का नुकसान हुआ हो. जिस तरह मुआवज़ा के लिए लोग हाथ फैलाए पड़े हैं उसे देख कर लगता है अब हर बात के लिए मुआवज़ा चाहिए. बारिश ना हो तो सूखे के नाम का. बारिश हो तो फसल के नुकसान के नाम पर. बीजेपी ने 15 दिया, केजरी ने 20 तो ममता दीदी 50 देंगी. किसी सरकार मे हिम्मत नही की इस बंदरबाँट पर क़ानून बनाए. जिधर देखो लपलपाति जीभें मूफ़्तखोरी मे लार टपकाती घूम रही हैं. व्यापारी लटक गया. लो भैया 10 लाख, सरकारी नौकरी के साथ. रोडवेस का ड्राइवर मार दिया लाओ भैया 1 करोड़. आने वाले टाइम मे मुआवज़ा एक देशव्यापी समस्या होने वाली है. हम ही वो घुण हैं जो मुआवज़े के साथ पिसेंगे. जिस तरह आरक्षण को शुरुआती 10 साल के लिए लगाया गया था किंतु बाद मे हटाया नही जा सका उसी तरह मुआवज़ा को भी कभी हटाया नही जा सकेगा. जो लोग मुआवज़ा मिलने पर खीँसे निपोरते घूम रहे हैं 20-30-50 साल बाद उन्ही की पीढ़ियाँ इसको बंद करवाने के लिए सरकार मे बैठे किसी मोदी को कोष रही होंगी. मुआवज़ा is another dirty face of Politics and parasite people of Indian Republic.

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