Monday, 19 January 2015

देशहित मे भाजपा का हारना

देशहित मे इस बार भाजपा का हारना बहोत जरूरी है। वैसे तो दिल्ली के चुनाव मे हमे कोई खास दिलचस्पी नहीं है। दूसरा यूं की हमे केजरीवाल जैसा धूर्त और मक्कार नेता पसंद नहीं है। इसलिये चाहते थे की आम आदमी पार्टी चुनाव हार जाये। किन्तु अब मन बदल गया है। अब मन का क्या है। बदल गया तो बदल गया। वो हुआ यूं की हमे लगता है की दिल्ली BJP के नेताओं की औकात नहीं है चुनाव जितने की। औकात तो आम आदमी पार्टी के नेताओ की भी नहीं है। पर भाजपा के नेता सिर्फ मोदी नाम के सहारे अपनी नैया पार करना चाहते हैं। सारे दिन AC कमरों से बाहर निकलते नहीं और सपना देखते हैं CM बनने का। अगर किरण बेदी के चक्कर मे BJP चुनाव जीत गयी तो फिर ये ट्रेंड बन जायेगा की सारे साल काम मत करो और चुनाव के टाइम किसी सूपरस्टार को पकड़ कर आगे कर दो। इन नेताओं की बेहूदगी का आलम ये है की अभी भी सिर्फ मोदी और बेदी के कारण अपनी जीत पक्की मान कर बैठे हैं। जनता के बीच जाने का मन नहीं करता इनका। वैसे यूं देखें तो केजरीवाल को भी नौटन्की के अलावा कुछ करना नहीं है किन्तु इस बार भाजपा का जीत का भ्रम टूटना बहोत जरूरी है दोस्तों। नही बस यूं ही बोल दिये अब वोट तो दिल्ली वालों को ही देनी है।

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