जब दुनिया बन रही होगी तो बनाने वाले ने जरूर ये पूछा होगा की अक्ल बड़ी या भैंस? जिसने अक्ल बताया उसको अक्ल मिल गयी। जिसने भैंस बताया उसको ना अक्ल मिली और शायद ना भैंस। इस श्रेणी के काफी लोग अपने होने का अहसास समय समय पर करवाते रहते हैं। एक होता है सावन के अंधे को चारों तरफ हरा ही दिखता है। माने यूँ की लोकसभा चुनाव मे मोदी से हारने के बाद सब अंधो को अब चारों और मोदी दिखता है। ताज्जुब होता है की इस पार्टी ने 44 सीट जीत कैसे ली? जनता की नज़रो मे गिरने की किस कदर होड़ मची हुई है ये बात पाकिस्तानी नाव के उपर मचे हुए घमासान से पता चल रही है। पूरी सुरक्षा प्रणाली पर ही सवाल उठाये जा रहे हैं। सवाल ये है की जिस पार्टी के नेताओ को दर्जन भर चुनाव हारने के बावजूद अब तक ये समझ नहीं आ रहा है की जनता उनके खिलाफ क्यूँ होती जा रही उस पार्टी ने कैसे 60 साल तक देश पर शासन कर लिया? कुछ माननीय कुलाचें मार मार के खुफिया रिपोर्ट्स और नेवी की कार्यवाही को सिर्फ इसलिये गलत बता रहे हैं की कहीं उसका श्रेय मोदी ना ले ले। इनको देख कर लगता है की शायद इनके लिये उस जमाने मे भैंस ही बड़ी रही होगी।
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