Saturday, 20 December 2014

निर्भया का स्टिंग और मेरा Experience

कल दिन भर टी वी पर निर्भया निर्भया का शोर छाया रहा। टीवी वाले स्टिंग दिखा रहे थे की कैसे दिल्ली के लोग लड़कियों को बचाने के लिये आगे नहीं आते। जब उन्होने एक बस का स्टिंग दिखाया तो मुझे 2008 की एक घटना याद आ गयी। रात के 9 बजे थे और मै धौला कुँआ से नोइडा जाने वाली 323 नंबर ब्लू लाइन बस मे था। बस मे कंडक्टर और हेलपर के नाम से 6 लड़के पड़े थे। लगभग सारे ही नशे मे फुल थे। एक लड़की और उसका बाप जिनको शायद कही उतरना था वो अपनी सीट से उठ कर दरवाजे पर आ गये। लड़की के साथ आगे वाले गेट की खिड़की पर बैठे हुए लड़के ने छेड़खानी शुरू कर दी। लड़के ने उन्हे उनके स्टैंड पर उतरने नहीं दिया। लड़की ने कुछ हो हल्ला मचाया। सब लोग मुर्दों की तरह शांत पड़े रहे। मेरा कॉलेज अभी हाल ही मे पूरा हुआ था। कॉलेज मे दिल खोल कर किये गये लड़ाई झगड़ों का असर था की मेरे अंदर कुछ हिम्मत बची हुई थी। उपर से नया नया जिम शुरू किया था तो मै भी फुल हवा मे था। आखिरकार मैने मोर्चा संभाला और जाकर् उस लड़के को सीधे 2 घूंसे मुह पर जड़ दिये। और लड़की के बाप को बोला पोलीस को फोन करे। इस से पहले कुछ और होता लड़की के पिता मे अचानक गज़ब की फुर्ती आ गयी और मेरा हाथ पकड़ कर बोला क्यूं फालतू मे लफड़ा कर रहे हो !! जाओ जाकर अपनी सीट पर बैठ जाओ। मन तो किया लड़के की बजाय लड़की के बाप का मुह तोड़ दूं। पर इस आपा धापी के बीच बस अगले स्टैंड पर रुकी और बाप बेटी उतर कर अंधेरे मे कही गुम हो गये। स्टिंग करने वालों को कैसे बताया जाये की सारे स्टिंग लड़कियों के लिये करने की बजाय एक दो स्टिंग हमारे जैसों का भी कर दिया करो। क्या पता किसी एक आध लड़की को शर्म आ जाये और कुछ हिम्मत कर ले आगे से। उस लड़के की छेड़खानी की लिस्ट मे अब तक ना जाने कितनी लड़कियां शामिल हो गयी होंगी।

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