लड़का लड़की को एक समान बताने वालो यथार्थ सुनिये। एक बहन है अपनी। मौसेरी। बड़ी मुश्किल से रिश्ता हुआ है। क्युकी दीपिका पादुकोण से थोड़ी कम खूबसूरत है। पढ़ी लिखी ज्यादा है। दुनियादारी की समझ आ गयी है। अपना अच्छा बुरा सोच सकती है। किंतु कोढ़ मे खाज ये की अकूत धन संपदा के भंडार नही हैं। अनपढ़ लोगों के पल्ले बंधने से साफ मना कर दिया। घर वालों की भी छाती 56 इंच की हो गयी। इतना पढाया है तो कम से कम कालेज की शक्ल देखने वाला लड़का तो मिलेगा ही। क्या कहा SUV नहीं दे सकते ? बड़े निर्लल्ज लोग हैं जो एक SUV के लिये इतने अच्छे घर के रिश्ते को ना कर दिया। माता पिता को चिंता दीमक की तरह खाए जा रही है। आखिरकार, सारे जहाँ की मिट्टी को अपने पैरों के नीचे पीस कर पतला कर देने के बाद खुशी का दिन आया। खुशी इतनी की धूम 3 के रेकॉर्ड तोड कमाई की खुशी भी फीकी पड जाये। हैसियत से ज्यादा खर्चा किया गया सगाई पर। संभ्रांत घर का लड़का जो मिला था। उपर से शरीफ इतना की गाय भी शरमा जाये। लगा की दाल मे कुछ काला है। सबके सामने होशियारी दिखाने की बजाय चुप रहने मे ही भलाई समझी। शुभ मुहूर्त निकलने वाला है। माँ बाप को लग रहा है की चार धाम यात्रा पूरी होने वाली है। मुझे तुम पसंद नही हो। एक लड़की पहले से ही मेरे जीवन मे है। उसको मै छोडूँगा नही। अपने घर वालों को मना नही करूँगा नही तो मेरी छवि खराब हो जायेगी। समझा करो तुम। या तो तुम ये रिश्ता तोड दो या उस लड़की को साथ मे मानते हुए, दुनिया को दिखाने के लिये मेरे साथ रहने को तैयार हो जाओ। बता दिया गया है शर्मीले लडके के द्वारा लड़की को। फोन पर साफ शब्दों में। माँ बाप के सावन मे पतझड़ आ गया। लडके के माता पिता का जवाब आया की लडका मजाक कर रहा था। दुर्भाग्य देखिये की सब कुछ जानते हुए भी रिश्ता तोड नही सकते। गांव भर के सामने सगाई हुई है। इज्जत का सवाल है। बचपन से बेटी को दिये गये संस्कार, नैतिकता और अच्छी शिक्षा सब बेमाने हो गये हैं। विडम्बना ये की सब कुछ जानते हुए रिश्ता किया जाये या नही। अच्छा होता की वो भी अपनी बेटी को जिस्म की नुमाइश करवा कर मॉडर्न संसार के समुद्र मे गोते लगवा देते। ना साला शादी का खर्चा और ना ही रिश्ता जोडने तोडने की फिक्र। सवाल ये की अब माँ बाप की चार धाम यात्रा पूरी कैसे हो?
पहले जब जिंदगी में थोड़ी फुर्सत होती थी तब कभी कभार किसी मुद्दे पर अपने विचार डायरी में लिखता था. फिर फेसबुक आया और हम फेसबुक को एक रफ़ नोट बुक की तरह यूज़ करने लगे. अपना लिखा हुआ सुरक्षित रखने के लिए अब फेसबुक के साथ साथ यहाँ अपने ब्लॉग पेज पर भी लिख लेते हैं. इसका एक फायदा ये भी है की समय के साथ आपके लिखने में क्या सुधार हो रहा है वो आप बड़ी आसानी से समझ सकते हैं. इच्छा ये है की किसी दिन ज्यादा से ज्यादा बड़ा लिखने लायक सिख सकूँ और फिर गर्व से सबको दिखा सकूँ.
Tuesday, 7 October 2014
लड़की होने का अभिशाप
लड़का लड़की को एक समान बताने वालो यथार्थ सुनिये। एक बहन है अपनी। मौसेरी। बड़ी मुश्किल से रिश्ता हुआ है। क्युकी दीपिका पादुकोण से थोड़ी कम खूबसूरत है। पढ़ी लिखी ज्यादा है। दुनियादारी की समझ आ गयी है। अपना अच्छा बुरा सोच सकती है। किंतु कोढ़ मे खाज ये की अकूत धन संपदा के भंडार नही हैं। अनपढ़ लोगों के पल्ले बंधने से साफ मना कर दिया। घर वालों की भी छाती 56 इंच की हो गयी। इतना पढाया है तो कम से कम कालेज की शक्ल देखने वाला लड़का तो मिलेगा ही। क्या कहा SUV नहीं दे सकते ? बड़े निर्लल्ज लोग हैं जो एक SUV के लिये इतने अच्छे घर के रिश्ते को ना कर दिया। माता पिता को चिंता दीमक की तरह खाए जा रही है। आखिरकार, सारे जहाँ की मिट्टी को अपने पैरों के नीचे पीस कर पतला कर देने के बाद खुशी का दिन आया। खुशी इतनी की धूम 3 के रेकॉर्ड तोड कमाई की खुशी भी फीकी पड जाये। हैसियत से ज्यादा खर्चा किया गया सगाई पर। संभ्रांत घर का लड़का जो मिला था। उपर से शरीफ इतना की गाय भी शरमा जाये। लगा की दाल मे कुछ काला है। सबके सामने होशियारी दिखाने की बजाय चुप रहने मे ही भलाई समझी। शुभ मुहूर्त निकलने वाला है। माँ बाप को लग रहा है की चार धाम यात्रा पूरी होने वाली है। मुझे तुम पसंद नही हो। एक लड़की पहले से ही मेरे जीवन मे है। उसको मै छोडूँगा नही। अपने घर वालों को मना नही करूँगा नही तो मेरी छवि खराब हो जायेगी। समझा करो तुम। या तो तुम ये रिश्ता तोड दो या उस लड़की को साथ मे मानते हुए, दुनिया को दिखाने के लिये मेरे साथ रहने को तैयार हो जाओ। बता दिया गया है शर्मीले लडके के द्वारा लड़की को। फोन पर साफ शब्दों में। माँ बाप के सावन मे पतझड़ आ गया। लडके के माता पिता का जवाब आया की लडका मजाक कर रहा था। दुर्भाग्य देखिये की सब कुछ जानते हुए भी रिश्ता तोड नही सकते। गांव भर के सामने सगाई हुई है। इज्जत का सवाल है। बचपन से बेटी को दिये गये संस्कार, नैतिकता और अच्छी शिक्षा सब बेमाने हो गये हैं। विडम्बना ये की सब कुछ जानते हुए रिश्ता किया जाये या नही। अच्छा होता की वो भी अपनी बेटी को जिस्म की नुमाइश करवा कर मॉडर्न संसार के समुद्र मे गोते लगवा देते। ना साला शादी का खर्चा और ना ही रिश्ता जोडने तोडने की फिक्र। सवाल ये की अब माँ बाप की चार धाम यात्रा पूरी कैसे हो?
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