काफी पहले अखबार मे किसी महापुरुष का कहा गया एक वाक्य
पढ़ा था। "पुस्तकें इंसान की सबसे अच्छी मित्र होती हैं।" बेशक होती हैं।
इसमे मै एक चीज़ और जोड़ना चाहता हूँ। वो ये की पुस्तक के अलावा कलम भी आपकी काफी अच्छी
मित्र हो सकती है। किन्तु कलम तभी अच्छी मित्र बन कर उभरेगी यदि आपको पुस्तकों का ज्ञान
है और नई नई पुस्तकें पढने का शौक है। वाह। कितना गज़ब का सुखद संयोग है। अच्छी पुस्तकें
पढ़ना और लिखना अपने आप मे बहोत ही आनंददायक है। आप अपने संपूर्ण जीवन मे कभी बोर नहीं
हो सकते यदि आपको इन दोनो मे से किसी एक भी चीज़ का शौक है तो। जिंदगी यूँ ही चलती
रहती है। हमें ऑफीस और दीन-दुनिया की चिंता भुला कर कुछ समय देना चाहिये। कलम उठाओ
और लिखना शुरू कर दो। कुछ भी। इंसान हमेशा ध्यान मग्न रहता है। बाकी किसी फालतू चीज़
के बारे मे सोचने के बारे मे समय ही नही मिल पाता है। अच्छी पुस्तकें और कलम ही हमे
हमसे मिलवाती हैं। मैने कुछ पुस्तकें पढ़ी हैं और जमा भी की है। जल्दी ही मै अपने घर
मे अच्छी पुस्तकों का एक संग्रहालय बनाना चाहता हूँ। शुरुआत हो चूकि है। लिखने की भी
और पढने की भी। साथ ही जिस अंजान लम्हे की वजह से मुझे ये सब करने की इच्छा जाग्रत्
हुई है उस अंजान लम्हे को मेरा बहोत बहोत साधुवाद।
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