Saturday, 19 December 2015

Breaking India Forces are now no more unreal gossips..।


कोई दुकानदार प्रतिस्पर्धी दुकानदार का धंधा खराब करने के लिये नगर निगम के पाइप लाइन वालों को पैसे खिलाता है कि प्रतिस्पर्धी की दुकान के सामने नाले का पाइप तोड़ दो या फूटपाथ खोद के रखो ताकि ......। युधों के तरीके बदल गये हैं.... पहले के जमाने मे राजाओं की सेनायें आमने सामने लडाईयां लड़ती थी....सेनाओं की वो लड़ाइयां बंदूक - तोप से होती हुई राकेट - मिसाईल और फिर cobart तक आ पंहुची। दूसरे देश को तोड़ने के लिए अभी जो लेटेस्ट फैशन है उसके हिसाब से उस देश के लोगों को भारी फंडिंग करो.... NGOs खुलवाओ....आये दिन धरने प्रदर्शन....तोड़ फोड़....सरकर विरोधी नारे..... सरकार को काम नहीं करने दो....लोगों को एक चुनी हुई सरकार और देश के संविधान के प्रति भड़काओ। सिर्फ दो दिन की छापेमारी में पचास हज़ार मीट्रिक टन से दालें बरामद की गई हैं....इतना स्टॉक कोई साधारण व्यापारी जमा नहीं कर सकते.... तो ये कोन लोग हैं जो इतने बड़े पैमाने पर जमाखोरी में लिप्त हैं.... महँग़ाई बढ़ने से किसको फायदा होगा। कुछ सिख उपद्रवी ही गुरु ग्रन्थ साहिब के पन्ने क्यों फाड़ने लगे हैं.... और फिर तुरंत केजरीवाल को शांत पड़े पंजाब के कोट कपूरा में अचानक से जाने की जरुरत क्यों आन पड़ी? धार्मिक झड़पें....दलित महादलित... बीफ...वीके सिंह ....मैं हिन्दू तू मुसलमान ....मीडिया अपने एजेंडे में कामयाब हो रहा है..... छोटी सी किश्ती को टाइटैनिक बना कर दिखाया जा रहा है. पर क्यूँ? प्रत्यक्ष तौर पर इसका जवाब भविष्य के गर्भ में छिपा है पर अप्रत्यक्ष हम और आप खूब देख और समझ रहे हैं. कड़ियाँ जुड़ती और राजनीती की गुथ्थी उलझती जा रही है. लड़ाई उस लेवल पर है जहाँ दुश्मन अनजान पर शातिर है. कुरुक्षेत्र के मैदान में डटी कौरवों की सेना धूर्तता की कोई भी सीमा लांघने के लिए तैयार खडी है. अपने आस पास निगाह रख कर बड़े पैमाने पर चल रहे षड्यंत्र को समझना जरुरी है...मजहब जात को दूर रख कर हमेशा सजग और चौकन्ना रहना भी देशभक्ति ही है। 
Breaking India Forces are now no more unreal gossips..।

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