मेरे साथ काम करने वालों में लगभग सभी भारतीय हैं जिसमे से 50 % हिन्दू हैं. पते की बात ये है की जो हिन्दू हैं उनमे से लगभग 65 % बीफ खाते हैं .....बड़े चाव से.....बिना किसी जोर जबरदस्ती के....सभी विकल्प होते हुए भी....मेनू में 1500 से ज्यादा विकल्प मौजूद हैं...फिर भी खाते हैं.....ज्यादा South और North East India से हैं. दूसरी मज़े की बात ये है की उनमे से अधिकतर पूजा पाठ में इतना विश्वाश रखते हैं जितना आमतौर पर मुझे अपने इलाके में देखने को नहीं मिलता. सुबह शाम स्नान करके तमाम तरह के क्रियाकलापों को अपनाते हुए घंटो तक भगवान की मूर्ति के सामने लंबलेट हुए रहते हैं. कुछ तो ऑफिस में भी य्य्य्ये बड़े बड़े चन्दन वाले तिलकधारी बन कर आते हैं. कुछ मेरे काफी अच्छे दोस्त हैं...दिन रात का साथ उठना बैठना है. कई बार पूछा है मैंने कि तुम हिन्दू होते हुए भी बीफ कैसे खा लेते हो? सुनकर आश्चर्यचकित होता हूँ की वो लोग घर में भी खाते हैं. कुछ के यहाँ तो गाय की बलि देने की परम्परा भी है.
लालू ने भी यही कहा है और कुछ गलत नहीं कहा है. यह बात सोलह आने सच है की बहुत से हिन्दू भी बीफ खाते हैं. पर चूँकि वोटों का ध्रुवीकरण होना है इसलिए इस बात को तो तूल दिया ही जाना चाहिए. पर यहीं से हमारे ढोंगी होने की बात भी सच होती है. बिल्ली को देख कर आँख बंद कर के बैठ गए हैं सब. कोई शक नहीं कि इस बार भाजपा को ही वोट दिया जाना चाहिए पर सिर्फ गाय के लिए नहीं. गाय को भाजपा नहीं हम ही बचा सकते हैं. हम उस दौर से गुजर रहे हैं जहाँ राजनीती हमारी खुद की सोच पर भारी पड़ रही है.
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