मुझे चाहिए पूर्ण आरक्षण।
गुजरों का तो हो गया। जाट भी लगे हैं लाईन में....देर सवेर उनका कोटा भी हो ही जाना है। पटेल भी अपनी AC गाड़ियों में बैठ कर मैदान में डट गये हैं। जैनियों को पहले ही अल्पसंख्यक बता कर खुश कर दिया गया है। उधर मराठी लोग भी कुछ बस गाड़ियाँ फुंकने की तैयारी कर रहे बताये जा रहे हैं। बाहमणों और बनियों सिर्फ़ तुम बचे। तुम लोग क्यूँ चुप हो? तुम भी लंगोट कस लो और बना दो इस देश को आरक्षण की रणभूमि।
विकास में हो ना हो, विनाश में सबकी बराबर की भागीदारी आवश्यक है। यलगार हो..!!
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